सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा होगी हाईटेक, आठ किलोमीटर तक निगरानी करने वाले ड्रोन का परीक्षण
शिप्रा तट पर विशेषज्ञ कंपनियों ने दिखाया लाइव सर्विलांस; भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपात स्थिति में होगा आधुनिक ड्रोन का उपयोग

उज्जैन, 28 जुलाई। सिंहस्थ-2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए उज्जैन प्रशासन आधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है। इसी उद्देश्य से मंगलवार को शिप्रा नदी के राणोजी की छत्री क्षेत्र में अत्याधुनिक ड्रोन सिस्टम का लाइव प्रदर्शन आयोजित किया गया।
चेन्नई, दिल्ली और गुरुग्राम की विशेषज्ञ कंपनियों ने अलग-अलग तकनीक से तैयार ड्रोन उड़ाकर उनकी निगरानी क्षमता, कैमरा गुणवत्ता, डेटा ट्रांसमिशन, उड़ान सीमा और आपातकालीन उपयोग की जानकारी दी। प्रदर्शन में शामिल कुछ ड्रोन करीब आठ किलोमीटर तक जाकर मेला क्षेत्र की गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम बताए गए।
घाटों और प्रमुख मार्गों का किया लाइव सर्विलांस
डेमो के दौरान ड्रोन कैमरों से शिप्रा नदी के घाटों, आसपास की गलियों, प्रमुख मार्गों और संभावित मेला क्षेत्र का लाइव सर्विलांस किया गया। कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो को अधिकारियों के सामने प्रदर्शित करते हुए बताया गया कि सिंहस्थ के दौरान किसी स्थान पर भीड़ का दबाव बढ़ने या अव्यवस्था की स्थिति बनने पर कंट्रोल रूम को तुरंत सूचना मिल सकेगी।
इस तकनीक की मदद से प्रशासन वास्तविक समय में भीड़ की गतिविधि, यातायात की स्थिति और घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या का आकलन कर सकेगा। इससे आवश्यकतानुसार पुलिस बल तैनात करने, मार्ग परिवर्तित करने और राहत दल भेजने में सहायता मिलेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों ने परखी तकनीकी क्षमता
ड्रोन प्रदर्शन के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश गुप्ता, संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने ड्रोन की उड़ान क्षमता, कैमरे की स्पष्टता, डेटा भेजने की गति, नियंत्रण प्रणाली और भीड़ के बीच उपयोग से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली। अलग-अलग कंपनियों ने छह से सात प्रकार के ड्रोन का प्रदर्शन किया।
पीए सिस्टम से भीड़ तक पहुंचाया जा सकेगा संदेश
प्रदर्शन में ऐसे ड्रोन भी शामिल किए गए, जिनमें पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाया गया है। इनके माध्यम से भीड़ वाले क्षेत्र में उड़ान भरते हुए श्रद्धालुओं तक आवश्यक घोषणाएं और दिशा-निर्देश पहुंचाए जा सकेंगे।
आपात स्थिति में इन ड्रोन से किसी मार्ग को खाली कराने, लोगों को सुरक्षित दिशा में भेजने या प्रशासनिक सूचना प्रसारित करने में मदद मिलेगी। कुछ मॉडल तेज डेटा ट्रांसमिशन और लंबी दूरी की निगरानी के लिए तैयार किए गए हैं।
कंट्रोल रूम से संचालित होगी निगरानी व्यवस्था
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम का उपयोग किया जाएगा। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार आयोजन अवधि में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए ड्रोन निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग मॉडल की क्षमता देखने के बाद यह तय किया जाएगा कि सिंहस्थ के लिए कितने और किस प्रकार के ड्रोन उपयोग में लिए जाएंगे। इनमें निगरानी, घोषणा और आपातकालीन सहायता के लिए अलग-अलग श्रेणी के ड्रोन शामिल हो सकते हैं।
श्रावण सवारी में भी तकनीक के उपयोग पर विचार
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व के साथ श्रावण-भादौ में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों को ध्यान में रखकर भी ड्रोन सिस्टम का परीक्षण किया गया है। कंपनियों द्वारा प्रस्तुत मॉडल की कैमरा क्षमता, उड़ान सीमा और पीए सिस्टम की गुणवत्ता का आकलन किया जा रहा है।
तकनीक उपयोगी पाए जाने पर इसे भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा निगरानी और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं में शामिल किया जा सकता है।
सुरक्षा के साथ यातायात प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। इनके माध्यम से प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव, घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति और पार्किंग क्षेत्रों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।
किसी स्थान पर अचानक भीड़ बढ़ने की स्थिति में ड्रोन से प्राप्त लाइव जानकारी के आधार पर प्रशासन मार्गों में बदलाव कर सकेगा। दुर्घटना या अन्य आपात परिस्थिति में राहत एवं बचाव दल को सटीक स्थान तक पहुंचाने में भी यह तकनीक उपयोगी होगी।
सिंहस्थ क्षेत्र में जारी हैं विकास कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर उज्जैन शहर और सिंहस्थ मेला क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। सड़क, पुल, घाट, पेयजल, विद्युत, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था के विस्तार के साथ डिजिटल निगरानी प्रणाली को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन का लक्ष्य सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम आयोजन के रूप में तैयार करना है।



