उज्जैन में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
जिले में अब तक 3 मरीजों की पुष्टि, एक महिला की मौत; खाचरौद और लक्ष्मीनगर के दो मरीज अस्पताल में भर्ती, चरक अस्पताल में रोज 200 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे

उज्जैन। मौसम में बदलाव के बीच उज्जैन जिले में मौसमी बीमारियों के साथ स्वाइन फ्लू के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में अब तक तीन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें एक महिला की मौत हो चुकी है, जबकि खाचरौद और लक्ष्मीनगर क्षेत्र के दो मरीज अस्पताल में उपचाररत हैं।
बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चरक अस्पताल में विशेष इंतजाम किए हैं। अस्पताल की चौथी मंजिल पर 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। यहां संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। विभाग के अनुसार आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध है।
बच्चों में सर्दी-खांसी और बुखार के मामले बढ़े
मौसम में उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिखाई दे रहा है। चरक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की है, जिन्हें सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत है।
जिन बच्चों की तबीयत सामान्य उपचार के बावजूद नहीं सुधरती या जिनकी स्थिति गंभीर होती है, उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। चरक अस्पताल का 75 बेड का शिशु वार्ड पूरी तरह भर चुका है।
बेड की कमी की स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखी है। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल के अनुसार जरूरत पड़ने पर अस्पताल की दूसरी मंजिल पर उपलब्ध अतिरिक्त वार्ड में बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा सकता है।
खाचरौद में घर-घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। खाचरौद में टीमों ने करीब 100 घरों का सर्वे कर 500 लोगों की स्क्रीनिंग की। इस दौरान स्वाइन फ्लू के साथ मलेरिया की जांच भी की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है और जरूरत के अनुसार जांच एवं दवाओं की व्यवस्था की जा रही है।
लक्षण बने रहें तो जांच जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने के दौरान सर्दी, खांसी और बुखार जैसी शिकायतें आम हो सकती हैं। हालांकि, यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तेज होते जाएं या मरीज की स्थिति बिगड़ने लगे तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार से मरीज के स्वास्थ्य पर नजर रखना आसान होता है।
आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टर और स्टाफ की ड्यूटी
सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि चरक अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए 10 बेड का अलग आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिया गया है। वार्ड में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और स्क्रीनिंग का काम लगातार जारी रहेगा।
उज्जैन में स्वाइन फ्लू को लेकर प्रमुख अपडेट
- जिले में अब तक 3 स्वाइन फ्लू मरीजों की पुष्टि
- एक महिला की मौत
- खाचरौद और लक्ष्मीनगर के दो मरीज अस्पताल में भर्ती
- चरक अस्पताल में 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड
- शिशु वार्ड के 75 बेड फुल
- रोजाना 200 से ज्यादा बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे
- खाचरौद में 100 घरों का सर्वे
- करीब 500 लोगों की स्क्रीनिंग
- स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी कर रहीं



