मध्य प्रदेश में लागू हुआ नया मंडी अधिनियम 2026: व्यापारियों की बढ़ेगी लागत, ई-नीलामी से होंगे भूखंड आवंटन
17 साल बाद बदले कृषि मंडी के नियम, लीज दरों में वृद्धि, गोदाम और भूखंड आवंटन की नई व्यवस्था लागू; व्यापारी संगठनों ने जताई कुछ प्रावधानों पर आपत्ति।

मध्य प्रदेश में 17 साल बाद बदले मंडी के नियम, व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक भार
उज्जैन। मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज मंडियों के संचालन और भूमि आवंटन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए कृषि मंडी अधिनियम-2026 लागू कर दिया है। लगभग 17 वर्षों बाद लागू हुए इस नए कानून के साथ वर्ष 2009 की व्यवस्था समाप्त हो गई है। नए प्रावधानों के लागू होने से मंडियों में व्यापार करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों को अब भूखंड, गोदाम और लीज संबंधी प्रक्रियाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक खर्च उठाना पड़ सकता है।
नई व्यवस्था के अनुसार मंडी परिसर में उपलब्ध भूखंड अथवा गोदाम अब 30 वर्ष की लीज पर दिए जाएंगे। इसके लिए 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर की निर्धारित दर लागू की गई है। साथ ही एक अनुज्ञप्तिधारी (लाइसेंसधारी) व्यापारी को केवल एक भूखंड लेने की पात्रता होगी।
ई-नीलामी से होगा भूखंडों का आवंटन
सरकार ने मंडी परिसरों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से भूखंड आवंटन की प्रक्रिया को ई-नीलामी से जोड़ दिया है। इससे आवंटन प्रक्रिया अधिक प्रतिस्पर्धी होगी और व्यापारियों को बाजार आधारित कीमत चुकानी पड़ सकती है। माना जा रहा है कि इससे छोटे और सीमित संसाधनों वाले व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
पुराने लीजधारकों पर भी लागू होंगे नए प्रावधान
जानकारी के अनुसार, पहले जिन व्यापारियों को लंबे समय के लिए कम दरों पर भूखंड आवंटित किए गए थे, उनके लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया भी अब नए अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप होगी। इससे पहले निर्धारित शर्तों की तुलना में लीज नवीनीकरण का खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
मंडी बोर्ड ने बताया बदलाव की वजह
मंडी बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2009 के अधिनियम में भूमि आवंटन, गोदाम संचालन और लीज व्यवस्था से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही थीं। इन्हें दूर करने और निवेश तथा पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से नया अधिनियम लागू किया गया है। इससे लंबे समय से लंबित भूखंड आवंटन और लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
व्यापारी संगठनों ने जताई चिंता
मध्य प्रदेश कृषि मंडी व्यापारी महासंघ का कहना है कि पुराने नियमों के तहत आवंटित भूखंडों का लीज नवीनीकरण पहले से तय शर्तों के आधार पर ही होना चाहिए। वहीं उज्जैन मंडी व्यापारी संघ ने भी नए अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए सरकार के समक्ष सुझाव और संशोधन प्रस्ताव रखने की बात कही है।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नया मंडी अधिनियम प्रशासनिक पारदर्शिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि बढ़ी हुई लीज दरों और ई-नीलामी व्यवस्था के कारण छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था से मंडी कारोबार और कृषि व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ता है।



