महाकाल की दूसरी सवारी में शामिल होगी हथिनी श्यामू, मंदिर समिति ने मालिक को भेजा पत्र
10 अगस्त को भगवान मनमहेश हाथी पर करेंगे नगर भ्रमण; वन विभाग की निगरानी और मेडिकल फिटनेस के बाद सवारी में होगी सहभागिता

उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ सवारी में पिछले करीब दस वर्षों से शामिल हो रही हथिनी श्यामू को लेकर बना संशय दूर हो गया है। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने हथिनी के मालिक सरमन गिरि को पत्र भेजकर 10 अगस्त को निकलने वाली दूसरी सवारी के लिए हाथी उपलब्ध कराने को कहा है।
समिति की ओर से भेजे गए पत्र में हथिनी को निर्धारित दिन दोपहर 2 बजे से पहले उपलब्ध कराने का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही सेवा के बदले नियमानुसार भुगतान किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि सवारी में हथिनी की अंतिम सहभागिता मेडिकल जांच और वन विभाग के निर्धारित सुरक्षा मानकों पर निर्भर रहेगी।
दूसरी सवारी में हाथी का विशेष महत्व
भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ सवारी का क्रम 3 अगस्त से शुरू होगा। इसके बाद 10 अगस्त को दूसरी सवारी निकाली जाएगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूसरी सवारी में भगवान मनमहेश हाथी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं।
महाकाल सवारी में हाथी को शामिल करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। वर्ष 1980 से पहले बैरागी अखाड़ों के हाथी सवारी में चलते थे। इसके बाद संत टाइगर गिरि की हथिनी रामू ने यह दायित्व संभाला। वर्ष 2016 से हथिनी श्यामू लगातार महाकाल की सवारी का हिस्सा बनती आ रही है।
वन विभाग ने अन्य हथिनियों के नाम भी सुझाए
उज्जैन में श्यामू के अतिरिक्त चार अन्य हथिनियां भी मौजूद हैं। वन विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इनके नाम मंदिर समिति को बताए हैं। इनमें रामजीदास पांडे की हथिनी मालती और श्रीराम मंदिर निर्मोही अखाड़े से जुड़ी हथिनी सुमा शामिल हैं। इसके अलावा विजयलक्ष्मी और फसील नामक दो अन्य हथिनियां भी निर्मोही अखाड़े के पास हैं।
वन विभाग के अनुसार इनमें से मेडिकल रूप से स्वस्थ हथिनी को आवश्यकता पड़ने पर सवारी में शामिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य और व्यवहार की होगी जांच
डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार पशु चिकित्सकों की टीम हथिनी श्यामू के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही है। सवारी से पहले हाथी की शारीरिक स्थिति के साथ उसके व्यवहार का भी परीक्षण किया जाता है।
जांच के दौरान यह देखा जाता है कि हाथी सामान्य रूप से भोजन कर रहा है या नहीं, भीड़ के बीच उसका व्यवहार कैसा है और वह महावत के निर्देशों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है। इसके अतिरिक्त उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री की भी समीक्षा की जाती है।
सवारी के साथ रहेगा विशेषज्ञ दल
महाकाल सवारी के दौरान वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का दल भी साथ चलता है। टीम में डॉक्टर, प्रशिक्षित महावत और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन शामिल रहते हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ हाथी को किसी तरह का तनाव या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी न होने देना है।
मंदिर समिति का पत्र जारी होने के बाद हथिनी श्यामू के दूसरी सवारी में शामिल होने का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है। अब वन विभाग की मेडिकल रिपोर्ट और अंतिम फिटनेस जांच के आधार पर उसकी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।



