गुरु पूर्णिमा पर संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कई आश्रमों में किया पूजन

दत्तात्रेय अखाड़ा, श्याम धाम, राजराजेश्वरी आश्रम, वाल्मीकि धाम और बगलामुखी धाम पहुंचे; बोले—गुरु के मार्गदर्शन के बिना मानव जीवन अधूरा

उज्जैन, 29 जुलाई। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के विभिन्न आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर संत-महात्माओं का सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने संतों को माल्यार्पण कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माता-पिता मनुष्य को जन्म देते हैं, लेकिन गुरु अपने ज्ञान और मार्गदर्शन से उसके जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु के अभाव में मानव जीवन अधूरा रहता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और संतों की शिक्षाएं समाज को संस्कार, सेवा तथा सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

दत्तात्रेय अखाड़े में धूनी और पीर गादी का पूजन

मुख्यमंत्री बुधवार रात शिप्रा तट स्थित गुरु दत्तात्रेय अखाड़ा पहुंचे। यहां उन्होंने पीर गादी और धूनी पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद अखाड़े के गादीपति महंत सुंदरपुरी महाराज पीर जी से भेंट कर आशीर्वाद लिया।

महंत सुंदरपुरी महाराज ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। अखाड़े पहुंचने पर संत समाज और श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

श्याम धाम और राजराजेश्वरी आश्रम भी पहुंचे

इसके बाद मुख्यमंत्री चिंतामन रोड स्थित मंगरोला फांटा के श्याम धाम आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने महंत श्याम गिरी महाराज, जिन्हें श्रद्धालु राधे-राधे बाबा के नाम से जानते हैं, का माल्यार्पण कर सम्मान किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने चिंतामन मार्ग स्थित राजराजेश्वरी आश्रम पहुंचकर आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद आचार्य शेखर महाराज से भी भेंट की। उन्होंने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए संत का सम्मान किया।

वाल्मीकि धाम में समाधि पर अर्पित किए पुष्प

मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि धाम पहुंचकर स्वामी सोहन दास महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और मंदिर में दर्शन किए। यहां उन्होंने सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज सहित अन्य संतों से सौजन्य भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान महाकाल की नगरी में स्थित प्रत्येक धाम और धार्मिक स्थल का अपना विशेष महत्व है। गुरु पूर्णिमा पर वाल्मीकि धाम में देश के कई राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि बालयोगी उमेशनाथ महाराज का मार्गदर्शन समाज और सरकार को निरंतर मिलता रहा है।

बगलामुखी धाम में संतों से की भेंट

इसके बाद मुख्यमंत्री बगलामुखी धाम पहुंचे। यहां उन्होंने संत मलंगनाथ महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और महंत रामनाथ महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत-महात्माओं की शिक्षाएं सामाजिक समरसता, जनसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करती हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व अपने मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी सीख को जीवन में अपनाने का अवसर है।

सिंहस्थ को लेकर जारी हैं विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सनातन संस्कृति और धार्मिक विरासत को साथ लेकर उज्जैन के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में निर्माण, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से संबंधित योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

धार्मिक स्थलों के विकास के साथ उज्जैन की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस दौरान विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर भाजपा अध्यक्ष संजय अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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