रक्षाबंधन पर भद्रा का नहीं रहेगा साया, बहनें 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में बांध सकेंगी राखी
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, 27 अगस्त की रात भद्रा होगी समाप्त; जानिए राखी बांधने के शुभ समय और मुहूर्त

उज्जैन। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर सबसे बड़ी राहत यह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार 27 अगस्त की रात ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, जिसके बाद अगले दिन बहनें शुभ समय में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
रक्षाबंधन को लेकर इस बार चंद्र ग्रहण की भी चर्चा है, लेकिन भारत में इसका धार्मिक पर्व पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जा रहा है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की रात से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी।
27 अगस्त की रात समाप्त होगी भद्रा
ज्योतिष गणना के अनुसार रक्षाबंधन से एक दिन पहले यानी 27 अगस्त की रात करीब 9:08 बजे भद्रा समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को राखी बांधने के दौरान भद्रा का साया नहीं रहेगा।
पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की रात 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:47 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि के आधार पर रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी पूजा और राखी बांधने के मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।
राखी बांधने के लिए ये समय रहेंगे शुभ
रक्षाबंधन के दिन अलग-अलग चौघड़िया में शुभ समय उपलब्ध रहेगा। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रातः 7:44 से 9:18 बजे तक — लाभ
- प्रातः 9:18 से 10:53 बजे तक — अमृत
- दोपहर 12:28 से 2:53 बजे तक — अमृत
- शाम 5:12 से 6:47 बजे तक — चर
- रात 9:38 से 11 बजे तक — लाभ
इनमें बहनें अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार राखी बांध सकती हैं।
अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त भी रहेंगे
रक्षाबंधन के दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:05 बजे तक रहेगा। वहीं शाम के समय गोधूलि मुहूर्त करीब 6:57 से 7:19 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों के लिए इन मुहूर्तों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
राखी बांधते समय बहनों को शुभ मंत्र का उच्चारण करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधि-विधान से भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है।
चंद्र ग्रहण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
रक्षाबंधन के आसपास चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में चर्चा है। हालांकि उपलब्ध ज्योतिषीय जानकारी के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक और धार्मिक पर्व पर प्रभाव मान्य नहीं होगा।



