विक्रम उद्योगपुरी के उद्योगों में स्थानीय युवाओं और किसानों को मिले रोजगार में प्राथमिकता: मुख्यमंत्री मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक परियोजनाओं का निरीक्षण किया; पेप्सिको इकाई, वर्किंग वूमेन हॉस्टल और प्रस्तावित निवेश की प्रगति जानी

उज्जैन, 30 जुलाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को विक्रम उद्योगपुरी का निरीक्षण कर वहां संचालित और निर्माणाधीन औद्योगिक परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब आसपास के गांवों और स्थानीय परिवारों की आय बढ़ेगी। उद्योगों को अपनी आवश्यकता के अनुसार स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा और क्षेत्र से रोजगार के लिए होने वाले पलायन में भी कमी आएगी।
उद्योगों की मांग के अनुसार फसल उत्पादन के लिए किसानों को करें प्रेरित
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विक्रम उद्योगपुरी में संचालित खाद्य प्रसंस्करण और अन्य औद्योगिक इकाइयों को जिन कृषि उत्पादों की आवश्यकता है, उनके उत्पादन के लिए स्थानीय किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। किसानों और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे उद्योगों को पर्याप्त कच्चा माल स्थानीय स्तर पर मिल सके।
उन्होंने कहा कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार फसल उत्पादन होने से किसानों को अपनी उपज के लिए नियमित बाजार मिलेगा। इससे परिवहन लागत कम होने के साथ किसानों की आमदनी में भी वृद्धि हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों, विकसित अधोसंरचना और निवेशकों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण मध्य प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो रहा है।
पेप्सिको की खाद्य प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने विक्रम उद्योगपुरी में स्थापित मेसर्स पेप्सिको इंडिया लिमिटेड की आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण किया। करीब 1,266 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार इस इकाई का वर्चुअल लोकार्पण मुख्यमंत्री द्वारा 30 जुलाई को किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना शुरू होने से लगभग 800 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा परिवहन, कृषि उपज आपूर्ति, पैकेजिंग, रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार भी तैयार होंगे।
मुख्यमंत्री ने इकाई के संचालन, उत्पादन क्षमता और कच्चे माल की आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने स्थानीय किसानों को औद्योगिक इकाई की आवश्यकता के अनुरूप कृषि उत्पादन से जोड़ने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
1,500 महिलाओं के लिए बन रहा आधुनिक हॉस्टल
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्र में 50.05 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे वर्किंग वूमेन हॉस्टल की प्रगति भी देखी। इस आवासीय परिसर में औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत लगभग 1,500 महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर आवास, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनने से उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें कार्यस्थल के नजदीक सम्मानजनक आवास मिल सकेगा।
उन्होंने निर्माण एजेंसी को काम की गुणवत्ता बनाए रखते हुए परियोजना निर्धारित समय में पूरी करने के निर्देश दिए।
ढाई वर्षों में 246 इकाइयों को भूमि आवंटित
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि पिछले ढाई वर्षों में उज्जैन जिले में 246 नई औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की गई है। इन इकाइयों से करीब 16,150 करोड़ रुपये के निवेश और 14,500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
लगभग 773 एकड़ में विकसित विक्रम उद्योगपुरी में अब तक 94 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 6,480 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मेडिकल डिवाइस पार्क में 74 इकाइयों को भूमि
करीब 360 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में अब तक 74 औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की गई है। इन इकाइयों के माध्यम से लगभग 2,894 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मेडिकल डिवाइस पार्क में स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित उपकरणों और आवश्यक उत्पादों के निर्माण की इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे उज्जैन को चिकित्सा उपकरण निर्माण के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायता मिलेगी।
488 हेक्टेयर में विकसित होगा दूसरा चरण
औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती मांग को देखते हुए करीब 488 हेक्टेयर भूमि पर विक्रम उद्योगपुरी का दूसरा चरण विकसित किया जा रहा है। यहां अल्केम लेबोरेट्रीज, अडानी समूह और वॉल्वो आयशर जैसी कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है।
इन परियोजनाओं से लगभग 4,800 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त 35 से अधिक अन्य औद्योगिक इकाइयों ने 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को भूमि आवंटन, सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
आईटी, वस्त्र और परिधान क्षेत्र में भी बढ़ेगा रोजगार
निर्माणाधीन आईटी पार्क का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से तकनीकी और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में मेसर्स बेस्ट लाइफ कॉर्पोरेशन और मेसर्स प्रतिभा स्वराज लिमिटेड द्वारा 315 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रहेगी।
निरीक्षण के दौरान एमपीआईडीसी के कार्यपालक निदेशक राजेश राठौड़ ने मुख्यमंत्री को संचालित एवं प्रस्तावित परियोजनाओं, औद्योगिक अधोसंरचना, भूमि आवंटन और निवेश की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।
इस दौरान विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी, नगर भाजपा अध्यक्ष संजय अग्रवाल, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, संभागायुक्त आशीष सिंह, पुलिस महानिरीक्षक राकेश गुप्ता, पुलिस उपमहानिरीक्षक नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



