ओंकारेश्वर में आकार लेगा भव्य एकात्म धाम, सीएम मोहन यादव ने पंचायतन मंदिर का किया शिलान्यास

सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी एकात्म यात्रा, देश-दुनिया तक पहुंचेगा भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति का संदेश

उज्जैन, 27 अगस्त। मध्यप्रदेश की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। पवित्र नगरी ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर विकसित हो रहे एकात्म धाम में गुरुवार को भव्य पंचायतन मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संतों और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में 45 पवित्र शिलाओं का विधिवत पूजन कर मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।

इस दौरान विभिन्न पीठों और वेद-विज्ञान परंपरा से जुड़े आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकात्म धाम को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पंचायतन मंदिर में दिखेगी भारतीय एकात्म दृष्टि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से पंचायतन पूजा परंपरा को प्रतिष्ठित किया था। प्रस्तावित मंदिर इसी विचारधारा को आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक अनुभूति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बनता है। ओंकारेश्वर में विकसित होने वाला यह धाम आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, समरसता, सद्भाव और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी एकात्म यात्रा

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सिंहस्थ-2028 से पहले भव्य एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा का समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। इसके माध्यम से देश और दुनिया तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संत परंपरा और एकात्म दर्शन का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर और उज्जैन को ऐसे आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

पंचदेवों की उपासना पर आधारित होगा मंदिर

पंचायतन शैली में बनने वाले मंदिर के मध्य भाग में भगवान शिव का मुख्य देवालय रहेगा। इसके चारों कोनों पर भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय बनाए जाएंगे।

मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। मुख्य देवालय के शिखर को ‘सोमतिलक’ शैली में तैयार किया जाएगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली पर आधारित होगा। मंदिर में चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था प्रस्तावित है।

100 नक्काशीदार स्तंभ और 121 कलश होंगे आकर्षण

मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और आठ लघु संवर्णा स्थापित किए जाएंगे। मुख्य मंडप में करीब 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। मंदिर 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान यानी ‘जगति’ पर निर्मित किया जा रहा है।

पूरे मंदिर को 121 कलशों से सजाया जाएगा। निर्माण में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है।

प्राचीन नागर स्थापत्य की झलक

पंचायतन मंदिर के बाहरी वास्तु-विन्यास में भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं का समावेश किया जाएगा। भव्य तोरण-द्वार इसकी स्थापत्य कला को और आकर्षक बनाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एकात्म धाम का विकास केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारतीय वास्तुकला, मूर्तिकला और आध्यात्मिक परंपरा को नई पहचान देने का माध्यम भी बनेगा।

कार्यक्रम में संत-महात्माओं के साथ जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

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