उज्जैन में शिप्रा आरती पर विवाद, 21 पंडों ने किया जल सत्याग्रह; महाकाल मंदिर समिति की नई व्यवस्था का विरोध

रामघाट पर आरती के स्वरूप को लेकर आमने-सामने पंडा समिति और मंदिर प्रबंधन, गंगा आरती की तर्ज पर नई व्यवस्था की तैयारी

उज्जैन। शिप्रा नदी के रामघाट पर आरती को लेकर उज्जैन में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से आरती को नए स्वरूप में आयोजित किए जाने के निर्णय के विरोध में श्री क्षेत्र पंडा समिति से जुड़े 21 पंडों ने शनिवार को शिप्रा नदी में उतरकर करीब एक घंटे तक जल सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर समिति की व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए आरती की पुरानी परंपरा को बनाए रखने की मांग की।

जानकारी के अनुसार, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा आरती को भव्य स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत रामघाट क्षेत्र में एक निर्धारित स्थान से आरती शुरू कराने की व्यवस्था बनाई गई है। समिति की योजना आरती को गंगा आरती की तर्ज पर अधिक आकर्षक और व्यवस्थित रूप देने की है।

21 पंडे नदी में उतरे, जताया विरोध

मंदिर समिति की नई व्यवस्था के विरोध में श्री क्षेत्र पंडा समिति के 21 सदस्य शिप्रा नदी के पानी में उतर गए। उन्होंने करीब एक घंटे तक जल सत्याग्रह करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान पंडों ने कहा कि शिप्रा आरती की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसे अचानक दूसरी व्यवस्था में शामिल करना उचित नहीं है।

पंडा समिति के सदस्यों ने कहा कि वे आरती की भव्यता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आरती कराने की मौजूदा परंपरा और व्यवस्था में बदलाव को लेकर उनकी आपत्ति है।

महाकाल मंदिर समिति की ओर से अलग आरती की तैयारी

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा आरती को नया स्वरूप देने के लिए रामघाट पर अलग स्थान निर्धारित किया गया है। समिति के अनुसार, यहां महाकाल मंदिर के वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान से जुड़े 21 बटुक प्रतिदिन शाम को आरती करेंगे।

समिति की योजना शिप्रा की आरती को बड़े धार्मिक आयोजनों की तर्ज पर व्यवस्थित करने की है। इसके तहत श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था और आरती के स्वरूप में विस्तार किए जाने की तैयारी है।

पंडा समिति ने निर्णय पर उठाए सवाल

श्री क्षेत्र पंडा समिति का कहना है कि शिप्रा आरती केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि उज्जैन की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी आस्था है। समिति के सदस्यों ने मंदिर प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

पंडा समिति के अनुसार, लंबे समय से रामघाट पर अलग-अलग स्थानों से शिप्रा आरती होती रही है। ऐसे में आरती की व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के बजाय सभी पक्षों के बीच सहमति बनाना जरूरी है।

गंगा आरती की तर्ज पर भव्य आयोजन की तैयारी

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति शिप्रा आरती को गंगा आरती की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी में है। समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक व्यवस्थित और भव्य धार्मिक अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए निर्धारित स्थान से आरती, प्रशिक्षित बटुकों की सहभागिता और अन्य व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।

अब शिप्रा आरती को लेकर मंदिर समिति और पंडा समिति के बीच सामने आए मतभेद के बाद प्रशासन के सामने दोनों पक्षों के बीच समन्वय बनाना चुनौती बन सकता है।

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