गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में दो युवाओं ने अपनाया संन्यास, नौकरी और कारोबार छोड़ किया स्वयं का पिंडदान
एयर इंडिया के पूर्व इंजीनियर और मुंबई के कारोबारी ने मौनी आश्रम में विधि-विधान से ली दीक्षा; सांसारिक जीवन त्यागकर आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़े

उज्जैन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन के मौनी आश्रम में दो युवाओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया। इनमें एक युवक एयर इंडिया में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत था, जबकि दूसरा मुंबई में प्लेसमेंट एजेंसी संचालित करता था। दोनों ने आश्रम में मुंडन और स्वयं का पिंडदान करने सहित संन्यास परंपरा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए।
इंजीनियर की नौकरी छोड़ आध्यात्मिक राह पर चले मनीष
बिहार के रहने वाले 25 वर्षीय मनीष कुमार बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एयर इंडिया में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। मनीष के अनुसार, बचपन से ही उनका झुकाव सनातन धर्म और आध्यात्मिक जीवन की ओर रहा है।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें प्रतिष्ठित नौकरी मिली, लेकिन उनका मन सांसारिक जीवन में नहीं लग रहा था। इसी दौरान वे मौनी आश्रम पहुंचे और सुमनानंद गिरी महाराज के संपर्क में आए। गुरु के सानिध्य में समय बिताने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर संन्यास लेने का निर्णय किया।
गुरु पूर्णिमा पर मनीष ने आश्रम में मुंडन कराया और धार्मिक परंपरा के अनुसार स्वयं का पिंडदान किया। इसके बाद गुरु के मार्गदर्शन में उन्हें संन्यास दीक्षा प्रदान की गई।
मुंबई का कारोबार छोड़ संन्यास ग्रहण किया
उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी 35 वर्षीय संचित शर्मा मुंबई में प्लेसमेंट एजेंसी चलाते थे। कारोबार व्यवस्थित रूप से चलने के बावजूद वे लंबे समय से आध्यात्मिक जीवन अपनाना चाहते थे।
संचित ने बताया कि संन्यास की इच्छा के चलते उन्होंने कई वर्षों से बाल नहीं कटवाए थे और जटाएं धारण कर रखी थीं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने शिखा मुंडन और स्वयं के पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद सांसारिक संबंधों का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया।
संन्यास परंपरा में पिंडदान का विशेष महत्व
संन्यास दीक्षा के दौरान स्वयं का पिंडदान सांसारिक पहचान और पुराने जीवन के प्रतीकात्मक त्याग से जुड़ी परंपरा मानी जाती है। इसके बाद दीक्षा लेने वाला व्यक्ति गुरु के निर्देशन में संयम, साधना और आध्यात्मिक जीवन का पालन करता है।
मौनी आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर आयोजित दीक्षा कार्यक्रम के दौरान संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में दोनों युवाओं ने धार्मिक विधियां पूरी कीं।
गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंचीं हर्षा रिछारिया
गुरु पूर्णिमा पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया भी मौनी आश्रम पहुंचीं और अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा व्यक्ति को ज्ञान, अनुशासन और जीवन की सही दिशा प्रदान करती है।
मौनी आश्रम पूर्व में भी संन्यास दीक्षा से जुड़े आयोजनों को लेकर चर्चा में रहा है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले कई लोगों ने गुरु के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक जीवन अपनाया है।



