डामर के डिब्बे में फंसे श्वान की बची जान, महिला अधिवक्ता ने पेश की मानवता की मिसाल
निर्माण कार्य के दौरान खुले छोड़े गए डामर के डिब्बे में फंसा था श्वान, महिला अधिवक्ता कृष्णा निषाद ने घंटों की मशक्कत कर सुरक्षित बाहर निकाला।

नागदा। नागदा के कोर्ट परिसर में बुधवार को एक मूक श्वान की जान उस समय संकट में पड़ गई, जब वह खाने की तलाश में डामर से भरे एक खुले डिब्बे में अपना मुंह डाल बैठा। बाहर निकलने की कोशिश में वह लगातार छटपटाता रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे देखकर मदद का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार एक महिला अधिवक्ता के प्रयासों से श्वान को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
जानकारी के अनुसार कोर्ट परिसर में निर्माण कार्य जारी है, जिसके चलते डामर से भरा एक डिब्बा खुला छोड़ दिया गया था। इसी दौरान एक आवारा श्वान भोजन की तलाश में वहां पहुंचा और उसका मुंह डिब्बे के अंदर फंस गया। काफी देर तक वह खुद को छुड़ाने का प्रयास करता रहा, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी।
घटना की सूचना मिलने पर अधिवक्ता कृष्णा निषाद ने तत्काल डायल-112 पर संपर्क कर मदद मांगी। हालांकि, मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए सहायता नहीं की कि उनका कार्यक्षेत्र पशुओं से संबंधित नहीं है। इसके बाद वे वहां से चले गए।
श्वानों को नियमित रूप से भोजन कराने वाली कृष्णा निषाद ने हार नहीं मानी। उन्होंने आसपास मौजूद लोगों की मदद से काफी सावधानी और धैर्य के साथ श्वान का मुंह डिब्बे से बाहर निकाला। राहत मिलने के बाद श्वान सुरक्षित वहां से चला गया।
कृष्णा निषाद ने बताया कि यदि समय रहते श्वान को नहीं निकाला जाता, तो डामर उसके मुंह और श्वसन तंत्र के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। उन्होंने निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों से अपील की कि काम खत्म होने के बाद डामर या अन्य खतरनाक सामग्री के डिब्बों को खुला न छोड़ें, ताकि भविष्य में किसी मूक पशु के साथ ऐसी घटना न हो।


