
पेपर लीक कानून और सख्त करने की तैयारी, संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी
दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव; मानसून सत्र में संसद के सामने रखा जा सकता है बिल
नई दिल्ली। प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार मौजूदा कानून को और कठोर बनाने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। इसे आगामी सप्ताह में संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वर्ष 2024 का मूल कानून पहले से लागू है। कैबिनेट ने कथित तौर पर उसी कानून के प्रावधानों को अधिक प्रभावी और कठोर बनाने वाले संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। आधिकारिक विधेयक संसद में पेश होने के बाद ही संशोधित धाराओं और दंड की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ा शिकंजा
प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रक्रिया में सुनियोजित गड़बड़ी करने वाले गिरोहों के विरुद्ध सजा तथा आर्थिक दंड बढ़ाने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गंभीर मामलों में दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष का कारावास और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना देने का प्रावधान प्रस्तावित किया जा सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि विधेयक की प्रति सामने आने के बाद ही होगी।
मौजूदा केंद्रीय कानून में सामान्य अनुचित साधनों के लिए तीन से पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध की स्थिति में पांच से दस साल तक कारावास और एक करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। सेवा प्रदाताओं पर भी आर्थिक दंड, परीक्षा की लागत की वसूली और प्रतिबंध जैसी कार्यवाही का प्रावधान है।
फास्ट ट्रैक अदालतों का भी प्रस्ताव
सरकार पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई को लंबा खिंचने से रोकने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था पर भी काम कर रही है। प्रस्ताव का उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना है, ताकि आरोपियों के विरुद्ध समयबद्ध तरीके से निर्णय हो सके।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत अधिसूचित भी की है। इसे इस दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है।
छात्र आंदोलनों के बीच सरकार का फैसला
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर विद्यार्थियों और विपक्षी दलों का विरोध जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, दोषियों को सजा और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके परिवारों के भरोसे से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी कारण मौजूदा कानून में अधिक कठोर प्रावधान जोड़ने और मामलों की तेज सुनवाई की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
संसद की मंजूरी के बाद लागू होंगे बदलाव
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया जाएगा। संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही नए प्रावधान कानून का हिस्सा बनेंगे।
विधेयक की आधिकारिक प्रति सामने आने पर यह स्पष्ट होगा कि 10 करोड़ रुपये का जुर्माना किन आरोपियों या संस्थाओं पर लागू होगा, क्या सभी अपराध गैर-जमानती होंगे और फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।



