राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम ने शिलांग कोर्ट में किया सरेंडर, न्यायिक हिरासत में भेजी गई
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण का दिया था निर्देश; 27 अप्रैल को निचली अदालत से मिली थी राहत

शिलांग/इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड की प्रमुख आरोपित सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए शिलांग की संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोनम ने शीर्ष अदालत की ओर से दी गई समय-सीमा समाप्त होने से पहले सरेंडर किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम की जमानत निरस्त करते हुए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा था कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और मुकदमे के मौजूदा चरण में आरोपित का जमानत पर बाहर रहना सुनवाई को प्रभावित कर सकता है।
27 अप्रैल को मिली थी जमानत
शिलांग की निचली अदालत ने 27 अप्रैल 2026 को सोनम को जमानत दी थी। अदालत ने गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी सही तरीके से नहीं दिए जाने और संबंधित दस्तावेजों में कथित त्रुटियों को महत्वपूर्ण माना था। बाद में मेघालय हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।
इसके बाद मेघालय सरकार ने जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए जमानत निरस्त कर दी और सोनम को दोबारा न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए आत्मसमर्पण का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मुकदमे की सुनवाई छह महीने में पूरी नहीं होने की स्थिति में सोनम नए सिरे से जमानत आवेदन पेश कर सकती है।
हनीमून के दौरान हत्या की साजिश रचने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि सोनम ने मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी। जांच एजेंसियों ने मामले में राज कुशवाह सहित अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में चल रही सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
राजा और सोनम 23 मई 2025 को मेघालय के सोहरा क्षेत्र की यात्रा के दौरान लापता हो गए थे। तलाश अभियान के बीच 2 जून को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ था। इसके बाद मामले की जांच हत्या और आपराधिक साजिश के दृष्टिकोण से आगे बढ़ी।
अब जेल में रहते हुए चलेगा मुकदमा
सोनम के आत्मसमर्पण के बाद अब वह न्यायिक हिरासत में रहते हुए मुकदमे की आगे की कार्यवाही का सामना करेगी। अभियोजन पक्ष गवाहों और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत करेगा, जबकि बचाव पक्ष को आरोपों का जवाब देने का अवसर मिलेगा।
यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। सोनम और अन्य आरोपितों पर लगे आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक आरोप ही माना जाएगा।



