
राज्यसभा में ‘मनुस्मृति’ टिप्पणी पर संग्राम, खड़गे-नड्डा आमने-सामने; बयान रिकॉर्ड से हटाया
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम पर विपक्ष का हमला; सत्ता पक्ष ने आरोपों के प्रमाण मांगे
नई दिल्ली। राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने से जुड़े संशोधन विधेयक की चर्चा गुरुवार को तीखी राजनीतिक बहस में बदल गई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की शिक्षा संस्थानों और ‘मनुस्मृति’ से जुड़ी टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने जोरदार आपत्ति जताई। हंगामा बढ़ने के बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 राज्यसभा में प्रस्तुत किया। इससे एक दिन पहले लोकसभा में चर्चा के बाद विधेयक पारित हो चुका था। सरकार ने इसे सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, संगठित पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के विरुद्ध कानूनी व्यवस्था मजबूत करने वाला कदम बताया है।
शिक्षा संस्थानों और पाठ्यक्रम पर खड़गे ने उठाए सवाल
विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए खड़गे ने आरोप लगाया कि देश की शैक्षणिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में योग्य शिक्षकों और कुलपतियों की नियुक्ति होनी चाहिए तथा पाठ्यक्रम में ऐसी कोई सामग्री शामिल नहीं की जानी चाहिए, जो सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती हो।
अपनी बात रखते हुए खड़गे ने शूद्रों के वेद सुनने अथवा उच्चारण करने पर कथित दंड से जुड़े कुछ संदर्भों का उल्लेख किया। इन उद्धरणों के मूल स्रोत को लेकर सदन में विवाद खड़ा हो गया और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनसे प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की।
नड्डा बोले—दावों को प्रमाणित किया जाए
नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे के आरोपों को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर प्रमाण और प्रामाणिक मूल पाठ के आधार पर ही बात रखी जानी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि अप्रमाणित टिप्पणियों से समाज में भ्रम और तनाव पैदा हो सकता है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी बहस में हस्तक्षेप करते हुए सर विलियम जोन्स के अनुवाद और डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तकों का संदर्भ दिया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने जवाब में सदन के भीतर एक पुस्तक दिखाते हुए कहा कि संबंधित सामग्री बाजार में उपलब्ध है और सरकार ने उस पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।
सभापति ने रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की
दोनों पक्षों के बीच बहस और नारेबाजी बढ़ने पर सभापति ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद खड़गे की ‘मनुस्मृति’ से जुड़ी टिप्पणी को राज्यसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की गई। हालांकि, शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी रही।
पेपर लीक पर सरकार को घेरा
खड़गे ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन दोषियों को समय पर सजा नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना और सजा बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, संस्थानों में रिक्त पद भरने और जवाबदेही तय करने की भी आवश्यकता है।
उन्होंने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा किसी विशेष वर्ग का अधिकार नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अवसर का माध्यम है। खड़गे ने परीक्षा व्यवस्था से प्रभावित विद्यार्थियों और हाल में हुए प्रदर्शनों का मुद्दा भी उठाया।
छात्र प्रदर्शन पर भी मांगा जवाब
विपक्ष के नेता ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए गृह मंत्री से सदन में जवाब देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया। सरकार की ओर से इन आरोपों को पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई पुलिस कार्यवाही बताया गया था।
सरकार ने विधेयक को बताया जरूरी सुधार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य संगठित नकल और पेपर लीक के मामलों के विरुद्ध मौजूदा कानूनी ढांचे को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का पक्ष रहा कि परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को निशाना बनाने के बजाय नकल कराने वाले संगठित गिरोहों, संस्थाओं और संबंधित अपराधियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
विधेयक की मूल चर्चा परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़ी थी, लेकिन ‘मनुस्मृति’ टिप्पणी के बाद सदन में राजनीतिक और वैचारिक टकराव केंद्र में आ गया।



